हमारे बारे में (About Us)
श्री कष्टभंजन देव सुंदरकांड सत्संग मंडल ट्रस्ट एक आध्यात्मिक और धर्मार्थ संस्था है, जो भक्ति, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और मानवता की निस्वार्थ सेवा के लिए समर्पित है। हमारा मुख्यालय गांधीनगर, गुजरात (भारत) में स्थित है।
हमारी यात्रा वर्ष २००५ में गांधीनगर के वाવોल स्थित 'कीर्तिधाम सोसाइटी' के ३-४ उत्साही मित्रों के एक छोटे से विचार से शुरू हुई थी। पूज्य गुरुजी श्री अश्विनकुमार पाठकजी की प्रेरणा से, हमने हर शनिवार को अपने घरों में सुंदरकांड के पाठ का संकल्प लिया ।
शुरुआत में गुरुजी की ऑडियो सीडी के माध्यम से पाठ किए जाते थे। धीरे-धीरे श्रद्धालु जुड़ते गए और यह समूह एक मंडल के रूप में विकसित हुआ 。 गुरुजी के सिद्धांतों का पालन करते हुए, हमारा मुख्य नियम 'निस्वार्थ सेवा' रहा है—अर्थात यजमान के घर पर जल के अतिरिक्त किसी भी प्रकार का दान या भेंट स्वीकार न करना।
८-१० वर्षों के निरंतर अभ्यास के बाद, मंडल के सदस्यों ने स्वयं वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण लिया और आज हम पूरी तरह से 'सजीव एवं संगीतमय सुंदरकांड पाठ' का आयोजन करते हैं। आज दिसंबर २०२५ तक, हमने सफलतापूर्वक १४०० से अधिक पाठ पूरे कर लिए हैं, जो गुजरात के प्रमुख मंदिरों से लेकर हरिद्वार और काशी तक गूँज रहे हैं।
हमारी संस्था "आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च" (अपने मोक्ष और विश्व के कल्याण के लिए) के सिद्धांत पर कार्य करती है।
हमारा ट्रस्ट ३૭ विभिन्न सामाजिक और धार्मिक बिंदुओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर का निर्माण (अंदाजित बजेट खर्च 51 करोड़ रुपये)
आध्यात्मिक विकास: निशुल्क संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन और भविष्य में एक भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण करना 。
शिक्षा: आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा सामग्री, किताबें और छात्रवृत्ति प्रदान करना 。
जीव दया: पक्षियों के लिए परिंडे, चबूतरे और गौशालाओं का निर्माण व संचालन करना 。
सामाजिक सहायता: असहाय लोगों के लिए चिकित्सा शिविर (Medical Camps), एम्बुलेंस सेवा, वृद्धाश्रम और प्राकृतिक आपदाओं के समय अनाज व कपड़ों की सहायता 。
महिला सशक्तिकरण: विधवा और जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु गृह उद्योगों का प्रशिक्षण देना 。
पंजीकरण संख्या: A/1052/Gandhinagar
NGO Darpan ID: GJ/2025/0613597
ईमेल: skdssmandal@gmail.com
वेबसाइट: www.sundarkand.net
नन्हा सा फूल है हम, प्रभु के चरणों की धुल है हम।
आये हे हम तो तेरे द्वार, प्रभुजी हमरी, पूजा करो स्वीकार।
सुन लो हमारी अर्ज़ी हमको कुछ ज्ञान दो,
जीवन को जीना सीखे ऐसा वरदान दो.
सूरज सी शान पाले, चंदा सा मान पाले
इतना सा देदो वरदान, गुरुजी हमरी पूजा करो स्वीकार।
हम तो निर्गुनियाँ हे, बस इतनी बात है,
हमरे जीवन की डोर, अब तेरे हाथ है,
थोडा सा गुण मिल जाए, निधर्न को धन मिल जाए,
माने तुम्हारा उपकार, प्रभुजी हमरी पूजा करो स्वीकार।
🙏🙏🙏नन्हा सा फूल है हम, प्रभु के चरणों की धुल है हम 🙏🙏🙏